पवित्र त्रित्व ईश्वर प्रेम, क्षमा एवं सामुदायिक जीवन का करता है आह्वान: महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद
रविवार, मई 31, 2026, पतराटोली, लोहरदगा: आज संत बेर्नादेत्त काथलिक गिरजाघर, पतराटोली लोहरदगा में दृढ़करण संस्कार ग्रहण करने का दिन आयोजित रहा। इस अवसर पर महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद मुख्य अनुष्ठाता रहें जिन्होंने दृढ़करण संस्कार के मिस्सा बलिदान की अगुवाई की एवं पल्ली के बच्चे बच्चियों को दृढ़करण संस्कार प्रदान किया। यह समारोह प्रथम परमप्रसाद ग्रहण करने का दिन भी रहा।
पल्ली आगमन पर विश्वासियों ने महाधर्माध्यक्ष का जोरदार स्वागत किया तत्पश्चात प्रथम परमप्रसाद संस्कार ग्रहण करने वाले एवं दृढ़करण संस्कार ग्रहण करने वाले बच्चे बच्चियों के साथ जुलूस में सभी पुरोहित वेदी के सम्मुख पहुंचे। संत बेर्नादेत्त काथलिक चर्च के पल्ली पुरोहित फाo शिशिर सुरीन ने सभी का स्वागत किया। इसके तुरन्त बाद ही मिस्सा बलिदान महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद की अगुवाई में प्रारंभ हुआ। चूंकि यह दिन पवित्र त्रित्व का महापर्व रहा इसलिए महाधर्माध्यक्ष ने अपने धर्मोपदेश में पवित्र त्रित्व के रहस्य को व्यावहारिक जीवन से जोड़ते हुए एक अत्यंत मर्मस्पर्शी संदेश दिया। उन्होंने कहा कि "ईश्वर एक है, पर अकेला नहीं । हमारा ईश्वर एक है, लेकिन वह अकेला नहीं है। वह पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा का एक ऐसा समुदाय है जो पूर्ण प्रेम और एकता में वास करता है। ईश्वर का यह रूप हमें सिखाता है कि ईसाई जीवन अकेले जीने के लिए नहीं, बल्कि समुदाय में रहने के लिए है। जैसे ईश्वर में तीन जन एक हैं, वैसे ही हमारे परिवारों को भी प्रेम और एकता में एक होना चाहिए। ईश्वर हमसे चाहते हैं कि हम अपने परिवारों से गहरा प्रेम करें। यह प्रेम केवल शब्दों में नहीं, बल्कि हमारे दैनिक व्यवहार में दिखना चाहिए।" साथ ही उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हम ईश्वर के इस आदर्श से दूर भटक रहे हैं। हम सांसारिक बातों में इतने उलझ गए हैं कि उस प्रेम को भूल बैठे हैं जिसके लिए ईश्वर ने हमें बनाया है। आज समाज और परिवारों में एक दुखद बदलाव देखा जा रहा है। हम प्रेम की जगह घृणा को बढ़ावा दे रहे हैं। महाधर्माध्यक्ष ने विशेष रूप से भाई-बहनों के बीच बढ़ते मनमुटाव पर चिंता व्यक्त की। आज परिवार के सदस्यों के बीच अहंकार इतना बढ़ गया है कि कोई भी एक-दूसरे को क्षमा करने के लिए तैयार नहीं है। उपदेश के पश्चात, महाधर्माध्यक्ष ने दृढ़करण संस्कार प्राप्त करने वाले सभी बच्चों के लिए विशेष प्रार्थना की। उन्होंने पवित्र तेल से उनके माथे पर क्रूस का चिह्न अंकित कर उन्हें पवित्र आत्मा के उपहारों से सुसज्जित किया। मिस्सा के अंत में दृढ़करण प्राप्त करने वालों को याद दिलाया कि वे अब कलीसिया के परिपक्व सदस्य हैं। उनका कर्तव्य है कि वे अपने परिवारों से घृणा और द्वेष को दूर करें और क्षमाशीलता के द्वारा शांतिदूत बनें। प्रथम परमप्रसाद संस्कार ग्रहण करने वाले बच्चे बच्चियों को भी ईश्वर को अपने जीवन में अहसास करते रहने का संदेश दिया। उनके अभिभावकों को भी उन्होंने बच्चों के आध्यात्मिक देखभाल के लिए धन्यवाद दिया एवं आगे भी अपने जिम्मेदारी को भली भांति निभाने का आह्वान किया। यह मिस्सा बलिदान संत बेर्नादेत्त चर्च की कलीसिया के लिए एक महान आध्यात्मिक जागृति का अवसर रहा। महाधर्माध्यक्ष के संदेश ने सभी विश्वासियों को अपने पारिवारिक रिश्तों को सुधारने, भाई-बहनों के बीच क्षमा की भावना विकसित करने और पवित्र त्रित्व के प्रेम को अपने जीवन में उतारने की नई प्रेरणा दी।
संत बेर्नादेत्त काथलिक चर्च लोहरदगा में आयोजित इस प्रथम परमप्रसाद संस्कार एवं दृढ़करण संस्कार ग्रहण करने के पावन अवसर पर महाधर्माध्यक्ष विंसेंट आईंद, पल्ली पुरोहित फाo शिशिर सुरीन, फ़ाo बीरेन्द्र खलखो, फाo दानियल डुंगडुंग, फ़ाo सिरिल, फाo बिनाय केरकेट्टा महाधर्माध्यक्ष के सचिव फाo असीम मिंज, धर्मबहनें एवं पल्ली के ख्रीस्त विश्वासी हज़ारों की संख्या में शामिल रहे।