रांची महाधर्मप्रांतीय काथलिक महिला संघ की 62वीं वार्षिक आमसभा सम्पन्न
15 हजार से अधिक महिलाओं की गरिमामयी सहभागिता, परिवार और समाज के परिवर्तन पर जोर
रांची महाधर्मप्रांतीय काथलिक महिला संघ की 62वीं वार्षिक आमसभा का भव्य आयोजन ईश माता माइन बसीलिका चर्च, राजा उल्हातु परिसर में संपन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर रांची महाधर्मप्रांत के लगभग सभी पल्लियों से लगभग 15 हजार से अधिक महिलाएँ अपने आध्यात्मिक अगुवाओं के साथ उपस्थित हुईं। समारोह के मुख्य अनुष्ठाता एवं मुख्य अतिथि रांची के महाधर्माध्यक्ष बिशप विंसेंट आइंद थे।
इस वर्ष का मुख्य विषय था – “काथलिक महिला संघ की माताओं से कलीसिया की अपेक्षाएँ” तथा “आधुनिक कलीसियाई जीवन में महिलाओं की सामाजिक चुनौतियाँ।”
मुख्य विषय पर प्रकाश डालते हुए फादर फ्रांसिस मिंज एस.जे. ने कहा कि हम परिवर्तन, अनिश्चितता और जटिलताओं से भरी दुनिया में जी रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज में संकट की घड़ी में महिलाएँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, फिर भी समाज में उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता और उनके योगदान को अक्सर कम आँका जाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि महिलाएँ समान मानवीय गरिमा के साथ सृजित की गई हैं। वे शिक्षिका, परिश्रमी, संरक्षक, संवेदनशील और ज्ञान से परिपूर्ण होती हैं। आज परिवार के परिवर्तन , शिक्षा, पारिवारिक विश्वास निर्माण, धार्मिक बुलाहट और सामाजिक परिवर्तन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।
दूसरे विषय पर झारखंड सरकार की प्रशासनिक सेवा संघ की अध्यक्ष श्रीमती रंजीता हेम्ब्रम ने कहा कि आधुनिक कलीसियाई जीवन में महिलाओं को परिवार निर्माण में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। बच्चों की उचित परवरिश, उनमें अच्छे संस्कारों का विकास और मोबाइल के दुरुपयोग से दूर रखने की जिम्मेदारी विशेष रूप से माताओं पर है। उन्होंने महिलाओं से आग्रह किया कि वे अपनी सोच को व्यापक बनाएं, चुगली से बचें, विश्वास में दृढ़ रहें और एक आदर्श शिक्षिका की भूमिका निभाएँ।
खिजरी विधायक श्री राजेश कच्छप ने अपने संबोधन में कहा कि केवल आर्थिक उन्नति ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक गहराई और जीवन में संतुलन भी आवश्यक है।
महाधर्माध्यक्ष बिशप विंसेंट आइंद ने अपने प्रवचन में प्रभु येसु के रूपांतरण प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि सच्चा परिवर्तन भीतर से प्रारंभ होता है। यदि महिलाओं में आध्यात्मिक रूपांतरण आता है तो परिवार और समाज दोनों में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र मिस्सा बलिदान से हुई, जिसकी अगुवाई महाधर्माध्यक्ष बिशप विंसेंट आइंद ने की तथा अनेक पुरोहितों ने सह-अनुष्ठान किया। द्वितीय सत्र में मुख्य अतिथि द्वारा ध्वजारोहण एवं दीप प्रज्वलन के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और विचार गोष्ठी आरंभ हुई। स्वागत भाषण, वक्ताओं के उद्बोधन, गीत-संगीत, नृत्य, पूर्व सभा की प्रतिवेदन प्रस्तुति तथा विभिन्न गणमान्य अतिथियों के संदेशों के साथ कार्यक्रम आगे बढ़ा। समापन समारोह की अगुवाई सभा नेत्री श्रीमती मार्था टोप्पो ने की।
इस अवसर पर आध्यात्मिक सलाहकार फादर आनन्द डेविड खलखो, सिस्टर दोरोथिया कुल्लू, सिस्टर सेलिन खलखो, डीन फादर अल्बर्ट लकड़ा, राष्ट्रीय काथलिक महिला संघ की सभानेत्री श्रीमती मनीषा टोप्पो, उत्री-पूर्वी काथलिक महिला संघ की सभानेत्री श्रीमती लिली बरला, महासचिव फ्रांसिस्का खलखो, केंद्रीय समिति के सदस्य श्रीमती श्रद्धा बरला, सुशीला तिग्गा, स्टेला सोय, बेनेदिक्ता हीनःगा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
यह आमसभा महिलाओं की एकता, जागरूकता और कलीसिया तथा समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण बनी।